पानी के लिए तरस रहे थे
अब हवा की मारामारी है
अगर नही जागे अभी तो
आगे भूख की हाहाकारी है
करो नियंत्रण जनसँख्या को
ये सबसे बड़ी बीमारी है ….
बहुत तरक्की कर ली तुमने
फिर भी प्रकृति से हार गए
अभी दो वक़्त की रोटी नही मयस्सर
आगे का जीवन बहुत भयकारी है
करो नियंत्रण जनसँख्या को तुम
ये सबसे बड़ी बीमारी है ….
रोटी कपड़ा और मकान की
लाखों लोगों को अभी भी तलाश है
फुटपाथों पर जो सोते हैं
वो अभी भी ज़िंदा लाश हैं
आने वाली पीढ़ी की ख़ातिर
की तुमने क्या तैयारी है
करो नियंत्रण जनसँख्या को
ये सबसे बड़ी बीमारी है ….
कवि – अजय बजरँगी




